जब चाणक्य ने कर ली तौबा !
Thursday, 18 October 2012
एक रात चाणक्य मेरे सपने में आये, मैंने उन्हें अपने
सम्मुख पाकर काफी खुश होते हुए उनका विधिवत तरीके से साष्टांग, प्रणाम - पाति किया |
चाणक्य: कैसे हो ब्रह्मर्षि बालक, सब कुशल मंगल है ना ?
ब्रह्मर्षि बालक: मत पूछिए गुरुदेव, आजकल शिक्षा जगत में बहुत विकट परिस्थिति चल रही है |
चाणक्य: यह बात तो तुम बिल्कुल शत प्रतिशत सच कह रहे हो |
ब्रह्मर्षि बालक: गुरुदेव बस आप ही एक ऐसे
हैं जो इस सम्बन्ध में कुछ कर सकते हैं | आपसे सविनय निवेदन
है की आप पुनर जन्म लें और शिक्षा जगत का कल्याण करें |
चाणक्य: ब्रह्मर्षि बालक का प्रतिउत्तर देते हुए अपने पंक्तियों के सहारे कुछ इस
प्रकार अपनी व्यथा को व्यक्त करते हुए कहते हैं -
तुमने मुझे मुर्ख समझ रखा है ब्रह्मर्षि बालक,
क्या तुम चाणक्य का नाम डूबाओगे ?
क्या तुम चाणक्य का नाम डूबाओगे ?
चाणक्य का पुनर जन्म कराके,
अब उसको भी नियोजित करवाओगे |
अब उसको भी नियोजित करवाओगे |
मात्र चार हज़ार की सेवा पर,
चाणक्य को दर – दर की ठोकरें खिलवाओगे ||
चाणक्य को दर – दर की ठोकरें खिलवाओगे ||
लेखक – संतोष कुमार
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