पेप्सी कोका कोला
Wednesday, 17 October 2012
चौराहे पर खड़े कुछ मनचले
युवकों में से एक कुंवारे युवक ने राह से गुजरती कुछ खूबसरत बालाओं की झुण्ड में
से एक अति सुन्दर कन्या की ओर इशारा करते हुए कहता है –
तुम ही हो मेरी पेप्सी
कोला (२)
जिसे देख कर मेरा तन मन डोला ||
जिसे देख कर मेरा तन मन डोला ||
मैं पास ही खड़ा यह तमाशा
देख रहा था | मुझसे भी रहा न गया, अंततः मैंने भी अपने मन की बात कह ही डाली –
घबराओ नहीं बालक तुम पेप्सी
कोला की बात करते हो (२)
पेप्सी कोला क्या चीज है,
एक दिन तुम्हें कोका कोला मिल जायेगी |
कुदरत का करिश्मा कह लो या माया,
समय अपना रंग दिखायेगी (२)
एक दिन तुम्हारी फ्रूटी भी इसी
राह से गुजरते हुए जायेगी ||
लेखक – संतोष कुमार
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